दुबार कला में मनाई गई भगवान परशुराम जयंती, शिक्षा व संस्कार पर दिया गया जोर
लालगंज।तहसील क्षेत्र के दुबार कला गांव में रविवार को ब्राह्मण एकता परिषद के तत्वावधान में भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वही समाज विकसित होता है।जिसमें संस्कार, चरित्र और शिक्षा का समुचित समावेश होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिषद के संस्थापक उमाकांत द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा ही सर्वोच्च विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ज्ञान, विज्ञान और शौर्य के प्रतीक हैं, जिन्होंने समाज को संस्कार, अनुशासन और कर्तव्य का मार्ग दिखाया।कर्मकांडी पंडित नीतीश कुमार द्विवेदी ने कहा कि वैदिक परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह नैतिक ज्ञान के माध्यम से जीवन शैली को भी विकसित करती है। वरिष्ठ नागरिक राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म ज्ञान और विज्ञान को सूर्य की रोशनी की तरह पूरे विश्व में फैलाने वाला माध्यम है जो किसी एक जाति या संगठन तक सीमित नहीं है।रिसर्च स्कॉलर राम त्रिपाठी ने कहा कि जो शिक्षा समय के अनुरूप होती है। वही निरंतर विकसित होती है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण स्वभाव से कर्तव्य और ज्ञान का पोषक होता है जो जाति और संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर सर्व समाज के हित में कार्य करता है।कार्यक्रम का संचालन कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया। स्वागत प्रदीप दुबे ने किया तथा आभार धीरज पाठक ने व्यक्त किया।





