कलेक्ट्रेट के पीछे निजी प्लॉट पर डाला जा रहा शहर का कचरा, रहवासियों में आक्रोश
शहर के उद्योगपति की है निजी जमीन, सरकारी जमीन होने की शिकायत पर कलेक्टर ने तहसीलदार को दिए जांच के निर्देश
कचरा की दुर्गन्ध से रहवासी परेशान, संक्रमित बीमारियां फैलने की आशंका
शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित एक निजी भूमि पर एमएसडब्ल्यू (MSW) कंपनी द्वारा लगातार शहर का कचरा डाला जा रहा है। इस घटना से आसपास के रहवासियों में भारी नाराजगी है और उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी खतरों को लेकर चिंता जताई है।बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर कचरा डाला जा रहा है, वह शहर के एक उद्योगपति की निजी संपत्ति है। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों ने इस भूमि को सरकारी जमीन बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासी सुभाष गर्ग का कहना है कि रोजाना यहां बड़ी मात्रा में कचरा डाले जाने से पूरे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई है कि इस तरह खुले में कचरा डाले जाने से संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं।
एक रहवासी ने बताया, “सुबह-शाम बदबू इतनी ज्यादा हो जाती है कि घर के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ और अन्य समस्याएं होने लगी हैं।कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश के बाद तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण करने की बात कही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि जमीन निजी है या सरकारी, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।इस पूरे मामले ने शहर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नगर पालिका और संबंधित एजेंसी द्वारा कचरा निस्तारण के लिए तय मानकों का पालन किया जा रहा है? यह एक बड़ा प्रश्न बनकर सामने आया है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए और कचरा डालने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। साथ ही, उचित स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या उत्पन्न न हो।





