अपना हक लेकर रहेंगे : लालजी
जालोर में “जेल भरो आंदोलन”, मुख्यमंत्री का पुतला फूंका
जालोर राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को जालोर में “जेल भरो आंदोलन” आयोजित किया गया। आंदोलन के तहत रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर विरोध जताया और बाद में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।
भीषण 46 डिग्री तापमान के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लिया। आंदोलनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। आयोजकों ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुंचेगा और अंततः 1 जुलाई को जयपुर में “महा-पड़ाव” के रूप में आयोजित किया जाएगा।
डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य डीएनटी समाज की 11 सूत्रीय मांगों को पूरा करवाना है। इनमें डीएनटी समाज को अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग प्रमुख है, जिसकी सिफारिश रेनके आयोग एवं ईदाते आयोग द्वारा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी आरक्षण उपवर्गीकरण कर डीएनटी समाज को “ए” वर्ग में रखने की बात कही है। इसके अलावा राजनीतिक भागीदारी, आवास पट्टे, जमीन और शिक्षा से जुड़ी मांगें भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में डीएनटी समाज की जनसंख्या लगभग 15 प्रतिशत यानी 1.23 करोड़ है।
डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया ने बताया कि यह आंदोलन पिछले दो वर्षों से चल रहा है। बालराई (पाली) में आयोजित “महा-पड़ाव” के बाद सरकार से वार्ता हुई थी और सरकार ने तीन माह का समय मांगा था, लेकिन पांच महीने बाद भी वार्ता दोबारा शुरू नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई करते हुए 78 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए तथा 6 लोगों को 18 दिन तक जेल में रखा।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के युवा अध्यक्ष भरत सराधना ने कहा कि अब इस आंदोलन में वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्ग भी शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सभी वर्ग “आरक्षण के उपवर्गीकरण” की मांग कर रहे हैं ताकि न्यायोचित आरक्षण व्यवस्था लागू हो सके और सभी समाजों को शिक्षा, रोजगार व राजनीति में समान भागीदारी मिल सके।
डीएनटी संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुखराज योगी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा भी एससी वर्ग में आरक्षण उपवर्गीकरण की आवश्यकता पर निर्णय दिया जा चुका है, जिससे सभी वर्गों को समान लाभ मिल सके।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के संस्थापक उपाध्यक्ष भीखूजी राईका, कपूरजी राईका एवं कोषाध्यक्ष किसनाराम देवासी ने बताया कि वंचित वर्गों ने मिलकर “दोस्त प्लस” मॉडल तैयार किया है, जिसमें डीएनटी, वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्ग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 150 समाज इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं और सभी न्यायपूर्ण आरक्षण व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
आरपीएस के जिलाध्यक्ष छगन देवासी ने बताया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया गया और पहली बार वंचित वर्ग अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर सामने आया है।
इस दौरान आरपीएस के राष्ट्रीय छात्र संघ अध्यक्ष ओमसिंह देवासी, वसुंधरा देवासी, आसूजी, नगजी एवं विकास देवासी सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।





