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संदीप मौर्य
कटनी ज़िले के थाना स्लीमानाबाद क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा भरदा में शाम से ही ग्रामीण महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। गांव में खुलेआम चल रही अवैध शराब बिक्री के खिलाफ सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सड़कों पर उतर आए और तीन घंटे तक चक्का जाम कर दिया। महिलाओं का साफ कहना था कि “जब तक शराब पूरी तरह बंद नहीं होती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
ग्राम की महिलाओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कौड़िया स्थित सरकारी शराब दुकान के मैनेजर और ठेकेदार की शह पर पूरे क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। इन लोगों की मिलीभगत से गांव-गांव में पैकरियां चल रही हैं, जिससे आए दिन झगड़े, घरेलू हिंसा और सामाजिक कलह की स्थिति बनी रहती है। महिलाओं ने कहा — “हमारे घर उजड़ रहे हैं, बहू-बेटियों की लज्जा खतरे में है, शराब ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है।”
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी स्लीमानाबाद सुदेश सुमन दल बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रही महिलाओं से लगातार कई घंटे बातचीत कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कटनी स्वयं मौके पर आकर कार्रवाई का आश्वासन नहीं देते, वे पीछे नहीं हटेंगी।
लगातार समझाइश और बातचीत के बाद थाना प्रभारी सुदेश सुमन ने महिलाओं को लिखित आश्वासन दिया कि तीन दिनों के भीतर गांव में बिक रही सभी अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह बंद करवा दी जाएगी। इसके बाद महिलाओं ने जाम खत्म किया और शांति बहाल हुई।
लेकिन सवाल अब भी बरकरार है —
आख़िर क्यों थाना क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही?
क्या प्रशासन और आबकारी विभाग की चुप्पी ठेकेदारों को खुली छूट दे रही है?
क्यों हर गांव — चाहे चरगवा, धूरी, खिरहनी, संसारपुर या तिहरी भगनावारा हो — अवैध शराब के खिलाफ विरोध का केंद्र बनता जा रहा है?
सरकार एक ओर “नशा मुक्ति अभियान” चला रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी ठेकों से जुड़े मैनेजर और ठेकेदार ग्रामीणों को नशे की आग में झोंक रहे हैं। महिलाओं की पीड़ा यही है कि उनके घरों में चूल्हा नहीं जल पा रहा, बच्चे भूखे सो रहे हैं और पति नशे में गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हैं।
अब यह देखना होगा कि कलेक्टर कटनी और पुलिस अधीक्षक कटनी इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर कितनी तत्परता दिखाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर अवैध शराब कारोबार में लिप्त ठेकेदारों, मैनेजरों और उनके संरक्षणकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि गांवों में शांति और मर्यादा दोबारा लौट सके।






