संदीप मौर्य ✍️
अधिकारियों ने ‘सुनील श्रीवास उर्फ मंजा’ को संरक्षण देकर कराया स्थल परिवर्तन, भ्रष्टाचार को वैधानिक रूप देने की साजिश बेनकाब
स्लीमनाबाद तहसील एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया, जिसमें अधिकारी और दलालों की मिलीभगत साफ झलकती है। ताजा खुलासे में सामने आया है कि तहसील परिसर में बैठे स्टांप वेंडर सुनील श्रीवास उर्फ मंजा, जो मूल रूप से ग्राम बरेली, पोस्ट खलरी, तहसील ढीमरखेड़ा का निवासी है, को अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से पान उमरिया के नाम पर पहले स्टांप वेंडर लाइसेंस दिलवाया और बाद में उसका स्थल परिवर्तन स्लीमनाबाद तहसील परिसर के लिए करा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सुनील श्रीवास उर्फ मंजा तहसील में अवैध रूप से दलाली और अनैतिक वसूली का काम करता था। वह किसानों, फरियादियों और आम नागरिकों से सरकारी कार्यों के नाम पर पैसों की मांग करता था। जब स्थानीय नागरिकों ने इस अवैध गतिविधि का विरोध किया, तब तहसील में बैठे कुछ अधिकारियों ने उसे बचाने के लिए पंजीयक कार्यालय कटनी को अनुशंसा भेजी, ताकि उसका लाइसेंस स्लीमनाबाद तहसील परिसर में बैठ के स्टाम्प विक्रय का बने, और स्लीमनाबाद तहसील में क्यों बैठता है वैध दिखे। जो लोग मंजा तहसील परिसर में क्यों बैठता है सवाल उठा रहे थे अधिकारियों ने उनका मुंह बंद कर दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि स्लीमनाबाद तहसील क्षेत्र में मौजूद आधा दर्जन वैध स्टांप वेंडरों को दरकिनार कर केवल सुनील श्रीवास उर्फ मंजा के नाम की अनुशंसा क्यों की गई? इससे साफ है कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार की जड़ों को गहरा करने और अपने “पालित दलाल” को संरक्षण देने की साजिश है।
जनता अब मांग कर रही है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, और सुनील श्रीवास उर्फ मंजा के द्वारा बनवाये गए स्टाम्प लाइसेंस को स्लीमनाबाद तहसील परिसर में विक्रय निरस्त किया जावे, ताकि स्लीमनाबाद तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार का अंत हो सके।






